'कुछ लोग ख़यालों से चले जाएं तो सोएं'; हबीब जालिब के शेर

Siraj Mahi
Sep 13, 2023

पा सकेंगे न उम्र भर जिस को... जुस्तुजू आज भी उसी की है

लोग डरते हैं दुश्मनी से तिरी... हम तिरी दोस्ती से डरते हैं

दुश्मनों ने जो दुश्मनी की है... दोस्तों ने भी क्या कमी की है

उन के आने के बाद भी 'जालिब'... देर तक उन का इंतिज़ार रहा

अम्न था प्यार था मोहब्बत था... रंग था नूर था नवा था फ़िराक़

अपनी तो दास्ताँ है बस इतनी... ग़म उठाए हैं शाएरी की है

कुछ लोग ख़यालों से चले जाएँ तो सोएँ... बीते हुए दिन रात न याद आएँ तो सोएँ

दुनिया तो चाहती है यूँही फ़ासले रहें... दुनिया के मश्वरों पे न जा उस गली में चल

जिन की यादों से रौशन हैं मेरी आँखें... दिल कहता है उन को भी मैं याद आता हूँ

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