हमदर्दी पर बेहतरीन शेर, जानें इसके माने

Siraj Mahi
Oct 25, 2023

राहत इंदौरी
जला न लो कहीं हमदर्दियों में अपना वजूद... गली में आग लगी हो तो अपने घर में रहो

अख़्तर शीरानी
कोई हमदर्द ज़माने में न पाया 'अख़्तर'... दिल को हसरत ही रही कोई हमारा होता

अमीर मीनाई
कहते हो कि हमदर्द किसी का नहीं सुनते... मैं ने तो रक़ीबों से सुना और ही कुछ है

राहत इंदौरी
कितना मानूस सा हमदर्दों का ये दर्द रहा... इश्क़ कुछ रोग नहीं था जो दवाई लेते

क़ाबिल अजमेरी
कहाँ तक मुझ से हमदर्दी कहाँ तक मेरी ग़म-ख़्वारी... हज़ारों ग़म हैं अनजाने सितारो तुम तो सो जाओ

राहत इंदौरी
मैं आ कर दुश्मनों में बस गया हूँ... यहाँ हमदर्द हैं दो-चार मेरे

इक़बाल साजिद
माँगी नहीं किसी से भी हमदर्दियों की भीक... 'साजिद' कभी ख़िलाफ़-ए-अना कुछ नहीं किया

अमित अहद
बहुत हमदर्द हैं मेरे मगर अंजान हैं सब... मिरे ज़ख़्मों की हालत को रफ़ूगर जानता है

अकमल इमाम
प्यार इश्क़ हमदर्दी और दोस्ती साज़िश... मेरे साथ होती है रोज़ इक नई साज़िश

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