'अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बांधेगा': रक्षा बंधन पर पढ़ें दिल छू लेने वाली शायरी

Siraj Mahi
Aug 30, 2023

एहसान साकिब
याद आई जब मुझे 'फ़रहत' से छोटी थी बहन... मेरे दुश्मन की बहन ने मुझ को राखी बाँध दी

आल-ए-अहमद सुरूर
सुब्ह को रोज़ अख़बार पढ़ती है ये... भाई बहनों से फिर जा के लड़ती है ये

मुनव्वर राना
किसी के जख्म पर चाहत से पट्टी कौन बांधेगा... अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बांधेगा

ज़रीफ़ जबलपूरी
हों दो बहनें बड़ी का उन में इकलौता मंगेतर हो... मोहब्बत से बपा दोनों के दिल में एक महशर हो

मुस्तफा अकबर
बहनों की मोहब्बत की है अज्मत की अलामत... राखी का है त्यौहार मोहब्बत की अलामत

ज़ेहरा निगाह
'ज़ेहरा' ने बहुत दिन से कुछ भी नहीं लिक्खा है!... सोचा था बहन भाई दरिया हैं मोहब्बत के

अबरार अहमद काशिफ़
बहन दी तुझे और शरीक-ए-सफ़र... ये रिश्ते ये नाते घराना ये घर

सय्यद जमीर जाफरी
बहन की इल्तिजा मां की मोहब्बत साथ चलती है... वफा-ए-दोस्तां बहर-ए-मशक्कत साथ चलती है

साहिर लुधियानवी
ग़रीब माओं शरीफ़ बहनों को अम्न-ओ-इज़्ज़त की ज़िंदगी दे... जिन्हें अता की है तू ने ताक़त उन्हें हिदायत की रौशनी दे

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