शिक्षक दिवस पर ये शायरी उस्ताद को भेजकर करें इंप्रेस

Tauseef Alam
Sep 05, 2023

मीर तक़ी मीर
ये फ़न्न-ए-इश्क़ है आवे उसे तीनत में जिस की हो.. तू ज़ाहिद पीर-ए-नाबालिग़ है बे-तह तुझ को क्या आवे

अल्ताफ़ हुसैन हाली
माँ बाप और उस्ताद सब हैं ख़ुदा की रहमत.. है रोक-टोक उन की हक़ में तुम्हारे ने'मत

रासिख़ अज़ीमाबादी
शागिर्द हैं हम 'मीर' से उस्ताद के 'रासिख़'.. उस्तादों का उस्ताद है उस्ताद हमारा

रासिख़ अज़ीमाबादी
शागिर्द हैं हम 'मीर' से उस्ताद के 'रासिख़'.. उस्तादों का उस्ताद है उस्ताद हमारा

चकबस्त ब्रिज नारायण
अदब ता'लीम का जौहर है ज़ेवर है जवानी का.. वही शागिर्द हैं जो ख़िदमत-ए-उस्ताद करते हैं

मुनीर शिकोहाबादी
उस्ताद के एहसान का कर शुक्र 'मुनीर' आज.. की अहल-ए-सुख़न ने तिरी तारीफ़ बड़ी बात

हफ़ीज़ जौनपुरी
अब मुझे मानें न मानें ऐ 'हफ़ीज़'.. मानते हैं सब मिरे उस्ताद को

मुनीर शिकोहाबादी
महरूम हूँ मैं ख़िदमत-ए-उस्ताद से 'मुनीर'.. कलकत्ता मुझ को गोर से भी तंग हो गया

अमानत लखनवी
किस तरह 'अमानत' न रहूँ ग़म से मैं दिल-गीर.. आँखों में फिरा करती है उस्ताद की सूरत

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