फ़िराक़ गोरखपुरी
लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है। उछल रहा है ज़माने में नाम-ए-आज़ादी

अनीस अंसारी
मैं ने आँखों में जला रखा है आज़ादी का तेल। मत अंधेरों से डरा रख कि मैं जो हूँ सो हूँ

नामालूम
वतन की ख़ाक ज़रा एड़ियाँ रगड़ने दे। मुझे यक़ीन है पानी यहीं से निकलेगा

लाल चन्द फ़लक
दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त। मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी

बनो ताहिरा सईद
कारवाँ जिन का लुटा राह में आज़ादी की। क़ौम का मुल्क का उन दर्द के मारों को सलाम

अल्लामा इक़बाल
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना। हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा

अल्लामा इक़बाल
जन्नत की ज़िंदगी है जिस की फ़ज़ा में जीना। मेरा वतन वही है मेरा वतन वही है

लाल चन्द फ़लक
तन-मन मिटाए जाओ तुम नाम-ए-क़ौमीयत पर। राह-ए-वतन पर अपनी जानें लड़ाए जाओ

सलीम कौसर
क़ुर्बतें होते हुए भी फ़ासलों में क़ैद हैं। कितनी आज़ादी से हम अपनी हदों में क़ैद हैं

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