जो गुज़ारी न जा सकी हम से हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है

Siraj Mahi
Jul 02, 2023


ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या


सारी दुनिया के ग़म हमारे हैं और सितम ये कि हम तुम्हारे हैं


क्या सितम है कि अब तिरी सूरत ग़ौर करने पे याद आती है


किस लिए देखती हो आईना तुम तो ख़ुद से भी ख़ूबसूरत हो


मुस्तक़िल बोलता ही रहता हूँ कितना ख़ामोश हूँ मैं अंदर से


ज़िंदगी किस तरह बसर होगी दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में


कौन इस घर की देख-भाल करे रोज़ इक चीज़ टूट जाती है


और तो क्या था बेचने के लिए अपनी आँखों के ख़्वाब बेचे हैं


सोचता हूँ कि उस की याद आख़िर अब किसे रात भर जगाती है

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