ज़िंदगी क्या है इक कहानी है, ये कहानी नहीं सुनानी है

Siraj Mahi
Jul 14, 2024

हम कहाँ और तुम कहाँ जानाँ, हैं कई हिज्र दरमियाँ जानाँ

इतना ख़ाली था अंदरूँ मेरा, कुछ दिनों तो ख़ुदा रहा मुझ में

रोया हूँ तो अपने दोस्तों में, पर तुझ से तो हँस के ही मिला हूँ

उस के होंटों पे रख के होंट अपने, बात ही हम तमाम कर रहे हैं

शब जो हम से हुआ मुआफ़ करो, नहीं पी थी बहक गए होंगे

ये बहुत ग़म की बात हो शायद, अब तो ग़म भी गँवा चुका हूँ मैं

गँवाई किस की तमन्ना में ज़िंदगी मैं ने, वो कौन है जिसे देखा नहीं कभी मैं ने

तुम्हारी याद में जीने की आरज़ू है अभी, कुछ अपना हाल सँभालूँ अगर इजाज़त हो

जाते जाते आप इतना काम तो कीजे मिरा, याद का सारा सर-ओ-सामाँ जलाते जाइए

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