सारी दुनिया के ग़म हमारे हैं... और सितम ये कि हम तुम्हारे हैं

Siraj Mahi
Oct 28, 2023


कौन इस घर की देख-भाल करे... रोज़ इक चीज़ टूट जाती है


किस लिए देखती हो आईना... तुम तो ख़ुद से भी ख़ूबसूरत हो


बिन तुम्हारे कभी नहीं आई... क्या मिरी नींद भी तुम्हारी है


अब मिरी कोई ज़िंदगी ही नहीं... अब भी तुम मेरी ज़िंदगी हो क्या


अब तो हर बात याद रहती है... ग़ालिबन मैं किसी को भूल गया


रोया हूँ तो अपने दोस्तों में... पर तुझ से तो हँस के ही मिला हूँ


सब मेरे बग़ैर मुतमइन हैं... मैं सब के बग़ैर जी रहा हूँ


जानिए उस से निभेगी किस तरह... वो ख़ुदा है मैं तो बंदा भी नहीं

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