जोश मलिहाबादी के शेर; 'मशवरे दे के हट गए अहबाब'

Siraj Mahi
Sep 06, 2023

आड़े आया न कोई मुश्किल में... मशवरे दे के हट गए अहबाब

उस ने वा'दा किया है आने का... रंग देखो ग़रीब ख़ाने का

आप से हम को रंज ही कैसा... मुस्कुरा दीजिए सफ़ाई से

हद है अपनी तरफ़ नहीं मैं भी... और उन की तरफ़ ख़ुदाई है

कोई आया तिरी झलक देखी... कोई बोला सुनी तिरी आवाज़

मेरे रोने का जिस में क़िस्सा है... तबस्सुम की सज़ा कितनी कड़ी है

गुलों को खिल के मुरझाना पड़ा है... उम्र का बेहतरीन हिस्सा है

बिगाड़ कर बनाए जा उभार कर मिटाए जा... कि मैं तिरा चराग़ हूँ जलाए जा बुझाए जा

हाँ कौन पूछता है ख़ुशी का नहुफ़्ता राज़... फिर ग़म का बार दिल पे उठाए हुए हैं हम

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