'मुझे मुस्कुरा मुस्कुरा कर न देखो', कैफ भोपाली के बेहतरीन शेर

Siraj Mahi
Nov 01, 2023


एक कमी थी ताज-महल में... मैं ने तिरी तस्वीर लगा दी


आप ने झूटा व'अदा कर के... आज हमारी उम्र बढ़ा दी


उस ने ये कह कर फेर दिया ख़त... ख़ून से क्यूँ तहरीर नहीं है


उन से मिल कर और भी कुछ बढ़ गईं... उलझनें फ़िक्रें क़यास-आराइयाँ


थोड़ा सा अक्स चाँद के पैकर में डाल दे... तू आ के जान रात के मंज़र में डाल दे


मेरे दिल ने देखा है यूँ भी उन को उलझन में... बार बार कमरे में बार बार आँगन में


ये दाढ़ियाँ ये तिलक धारियाँ नहीं चलतीं... हमारे अहद में मक्कारियाँ नहीं चलतीं


सच तो ये है फूल का दिल भी छलनी है... हँसता चेहरा एक बहाना लगता है


मुझे मुस्कुरा मुस्कुरा कर न देखो... मिरे साथ तुम भी हो रुस्वाइयों में

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