दिल को सुकून देंगे कैफी आजमी के ये चुनिंदा शेर

Siraj Mahi
Oct 24, 2023


मेरा बचपन भी साथ ले आया... गाँव से जब भी आ गया कोई


इतना तो ज़िंदगी में किसी के ख़लल पड़े... हँसने से हो सुकून न रोने से कल पड़े


हर क़दम पर उधर मुड़ के देखा... उन की महफ़िल से हम उठ तो आए


कोई कहता था समुंदर हूँ मैं... और मिरी जेब में क़तरा भी नहीं


की है कोई हसीन ख़ता हर ख़ता के साथ... थोड़ा सा प्यार भी मुझे दे दो सज़ा के साथ


इंसाँ की ख़्वाहिशों की कोई इंतिहा नहीं... दो गज़ ज़मीं भी चाहिए दो गज़ कफ़न के बाद


तिरी उमीद पे ठुकरा रहा हूँ दुनिया को... तुझे भी अपने पे ये ए'तिबार है कि नहीं


जो इक ख़ुदा नहीं मिलता तो इतना मातम क्यूँ... यहाँ तो कोई मिरा हम-ज़बाँ नहीं मिलता


पाया भी उन को खो भी दिया चुप भी हो रहे... इक मुख़्तसर सी रात में सदियाँ गुज़र गईं

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