"मैं ने बस इतना ही लिखा आई-लौ-यू और फिर"; खालिद इरफ़ान के शेर

Siraj Mahi
Jun 20, 2024

टैलेंट
भूक तख़्लीक़ का टैलेंट बढ़ा देती है... पेट ख़ाली हो तो हम शेर नया कहते हैं

दरीचा
अब घर के दरीचे में आएगी हवा कैसे... आगे भी प्लाज़ा है पीछे भी प्लाज़ा है

बजट
कैसा अजीब आया है इस साल का बजट... मुर्ग़ी का जो बजट है वही दाल का बजट

साहिल
गर्मी जो आई घर का हवा-दान खुल गया... साहिल पे जब गया तो हर इंसान खुल गया

समाअत
दो चार दिन से मेरी समाअत ब्लाक थी... तुम ने ग़ज़ल पढ़ी तो मिरा कान खुल गया

मज़ाक़
टीवी का ये मज़ाक़ अदीबों के साथ है... शाएर से दुगना रख दिया क़व्वाल का बजट

किताब
बिकती है अब किताब भी कैसेट के रेट पे... कैसे बनेगा 'ग़ालिब' ओ 'इक़बाल' का बजट

गाल
मैं ने बस इतना ही लिखा आई-लौ-यू और फिर... उस ने आगे कर दिया था गाल इंटरनेट पर

ताली
न हों पैसे तो इस्तक़बालियों से कुछ नहीं होगा... किसी शायर को ख़ाली तालियों से कुछ नहीं होगा

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