फ़िराक़ गोरखपुरी
कोई समझे तो एक बात कहूँ इश्क़ तौफ़ीक़ है गुनाह नहीं

Siraj Mahi
Jun 08, 2023

जौन एलिया
सारी दुनिया के ग़म हमारे हैं और सितम ये कि हम तुम्हारे हैं

गुलज़ार
आप के बा'द हर घड़ी हम ने आप के साथ ही गुज़ारी है

अल्लामा इक़बाल
तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ मिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ

नासिर काज़मी
दिल धड़कने का सबब याद आया वो तिरी याद थी अब याद आया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा

राहत इंदौरी
उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है

बशीर बद्र
न जी भर के देखा न कुछ बात की बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की

अहमद फ़राज़
हुआ है तुझ से बिछड़ने के बा'द ये मा'लूम कि तू नहीं था तिरे साथ एक दुनिया थी

अमीर मीनाई
तुम को आता है प्यार पर ग़ुस्सा मुझ को ग़ुस्से पे प्यार आता है

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