Mahila Aarakshan Bill 2023
महिला आरक्षण बिल 2023 संविधान में महिलाओं की 33 फीसद रिजर्वेशन की बात करता है.

Sami Siddiqui
Sep 20, 2023

33 फीसद महिला जन प्रतिनिधि
इसके पास होने से संसद और राज्य विधान सभाओं में 33 फीसद महिला जन प्रतिनिधि चुनकर आएंगी.

1996 में किया गया पेश
ये बिल 1996 से अधर में लटा है. इसे एचडी देवगौड़ा सरकार ने 12 सितंबर 1996 को पहली बार संसद में पेश किया था.

नहीं हो पाया पास
बिल को 81वें संविधान संशोधन बिल के तौर पर पेश किया गया था, लेकिन यह पास नहीं हो पाया.

वाजपेयी के कार्यकाल में हुआ था पेश
1998 में एक बार फिर लोकसभा में ये बिल पेश किया गया था. लेकिन सरकार को विपक्ष के विरोध का सामना करना पड़ा और बिल पास नहीं हो पाया.

कई कोशिश, लेकिन सभी बेकार
इसके बाद उन्होंने 1999, 2002 और 2003-2004 में इस बिल को पास करने की कोशिश की, लेकिन नाकामी ही हाथ लगी.

मनमोहन सरकार ने किया पेश
इसके बाद 2008 में मनमोहन सरकार ने इसे 108वें संविधान संशोधन बिल के तौर पर राज्यसभा में पेश किया था.

नहीं किया लोकसभा में पेश
वहां से यह बिल भारी बहुमत से पास हुआ, सभी दलों ने इसका समर्थन किया. लेकिन कांग्रेस ने इसे लोक सभा में पेश नहीं किया.

न्याय संबंधी स्थायी समिति को भेजा गया
2008 में ये बिल क़ानून और न्याय संबंधी स्थायी समिति को भेजा गया. इसके दो सदस्य समाजवादी पार्टी से ताल्लुक रखते थे.

वीरेंद्र भाटिया और शैलेंद्र कुमार ने कही ये बात
कमेटी के मेंबर वीरेंद्र भाटिया और शैलेंद्र कुमार ने कहा वह इस बिल से सहमत नहीं है. महिलाओं का आरक्षण 20 फीसद से ज्यादा न हो

2023 में पेश
अब एक बार फिर बीजेपी ने इसे पार्लियामेंट में पेश किया है. फिलहाल लोकसभा में महिलाओं की भागेदारी 15 और राज्यसभा में 13 फीसद है.

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