ये जो चुपके से आए बैठे हैं, लाख फ़ित्ने उठाए बैठे हैं

Siraj Mahi
Jul 29, 2024

क्या हमारी नमाज़ क्या रोज़ा, बख़्श देने के सौ बहाने हैं

जान इंसाँ की लेने वालों में, एक है मौत दूसरा है इश्क़

अब्र की तीरगी में हम को तो, सूझता कुछ नहीं सिवाए शराब

आ ही कूदा था दैर में वाइ'ज़, हम ने टाला ख़ुदा ख़ुदा कर के

इतना मरदूद हूँ कि डर है मुझे, क़ब्र से फेंक दे ज़मीं न कहीं

अपनी कश्ती का है ख़ुदा हाफ़िज़, पीछे तूफ़ाँ है सामने गिर्दाब

किसी से इश्क़ अपना क्या छुपाएं, मोहब्बत टपकी पड़ती है नज़र से

चुरा के मुट्ठी में दिल को छुपाए बैठे हैं, बहाना ये है कि मेहंदी लगाए बैठे हैं

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