मिर्जा गालिब की शायरी की अब तक की सबसे बेहतरीन लाइनें...

Siraj Mahi
Oct 22, 2023

प्यार और बरकतें
जान तुम पर निसार करता हूं... मैं नहीं जानता दुआ क्या है

प्यार और खुशी
उनको देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक... वो समझते हैं के बीमार का हाल अच्छा है

प्यार में कमजोरी
इश्क ने गालिब निकम्मा कर दिया... वरना हम भी आदमी थे काम के

प्यार और चाहत
हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले... बहुत निकले मेरे अरमान फिर भी कम निकले

पहली नजर में प्यार
दिल से तेरी निगाह जिगर तक उतर गई... दोनों को एक अदा में रजामंद कर गई

दिल के मामले
मोहब्बत में नहीं है फर्क जीने और मरने का... उसी को देखकर जीते हैं जिस काफिर पर दम निकले

चाहत भरी सोच
हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन... दिल के बहलाने को गालिब ये ख्याल अच्छा है

उम्मीद
हाथों की लकीरों पर मत जा ऐ गालिब... नसीब उनके भी होते हैं जिनके हाथ नहीं होते

प्यार और लालसा
दिल ए नादान तुझे हुआ क्या है आखिर इस दर्द की दवा क्या है... हमको उन से वफा की है उम्मीद जो नहीं जानते वफा क्या है

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