'हम नहीं थे तो क्या कमी थी यहाँ', मुनव्वर राणा के शेर

Siraj Mahi
Sep 30, 2023

हम नहीं थे तो क्या कमी थी यहाँ... हम न होंगे तो क्या कमी होगी

हर चेहरे में आता है नज़र एक ही चेहरा... लगता है कोई मेरी नज़र बाँधे हुए है

इश्क़ है तो इश्क़ का इज़हार होना चाहिए... आप को चेहरे से भी बीमार होना चाहिए

दहलीज़ पर सर खोले खड़ी होगी ज़रूरत... अब ऐसे में घर जाना मुनासिब नहीं होगा

ऐसा लगता है कि वो भूल गया है हम को... अब कभी खिड़की का पर्दा नहीं बदला जाता

बर्बाद कर दिया हमें परदेस ने मगर... माँ सब से कह रही है कि बेटा मज़े में है

तुम्हारा नाम आया और हम तकने लगे रस्ता... तुम्हारी याद आई और खिड़की खोल दी हम ने

लिपट जाता हूँ माँ से और मौसी मुस्कुराती है... मैं उर्दू में ग़ज़ल कहता हूँ हिन्दी मुस्कुराती है

घर में रहते हुए ग़ैरों की तरह होती हैं... लड़कियाँ धान के पौदों की तरह होती हैं

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