पूछते हैं कि क्या हुआ दिल को हुस्न वालों की सादगी न गई

Siraj Mahi
Jun 21, 2023


किसी अकेली शाम की चुप में गीत पुराने गा के देखो


तुम मेरे लिए इतने परेशान से क्यूँ हो मैं डूब भी जाता तो कहीं और उभरता


रहना था उस के साथ बहुत देर तक मगर इन रोज़ ओ शब में मुझ को ये फ़ुर्सत नहीं मिली


कुछ वक़्त चाहते थे कि सोचें तिरे लिए तू ने वो वक़्त हम को ज़माने नहीं दिया


ग़म की बारिश ने भी तेरे नक़्श को धोया नहीं तू ने मुझ को खो दिया मैं ने तुझे खोया नहीं


घटा देख कर ख़ुश हुईं लड़कियाँ छतों पर खिले फूल बरसात के


वो जिस को मैं समझता रहा कामयाब दिन वो दिन था मेरी उम्र का सब से ख़राब दिन


किसी को अपने अमल का हिसाब क्या देते सवाल सारे ग़लत थे जवाब क्या देते


मैं बहुत कमज़ोर था इस मुल्क में हिजरत के बाद पर मुझे इस मुल्क में कमज़ोर-तर उस ने किया

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