"दिल के रिश्ते अजीब रिश्ते हैं, सांस लेने से टूट जाते हैं"

Siraj Mahi
May 26, 2024

ख़ुशी
यूँ तो वो हर किसी से मिलती है... हम से अपनी ख़ुशी से मिलती है

होश
इस तरह होश गँवाना भी कोई बात नहीं... और यूँ होश से रहने में भी नादानी है

हुस्न
ख़ुदा करे कि तिरे हुस्न को ज़वाल न हो... मैं चाहता हूँ तुझे यूँही उम्र-भर देखूँ

तलाश
मैं किस के हाथ पे अपना लहू तलाश करूँ... तमाम शहर ने पहने हुए हैं दस्ताने

पत्थरों
इन्हीं पत्थरों पे चल कर अगर आ सको तो आओ... मिरे घर के रास्ते में कोई कहकशाँ नहीं है

तबस्सुम
मिरी रूह की हक़ीक़त मिरे आँसुओं से पूछो... मिरा मज्लिसी तबस्सुम मिरा तर्जुमाँ नहीं है

रूह
रूह के इस वीराने में तेरी याद ही सब कुछ थी... आज तो वो भी यूँ गुज़री जैसे ग़रीबों का त्यौहार

रिवायत
हम ने तो लुट के मोहब्बत की रिवायत रख ली... उन से तो पोछिए वो किस लिए पछताते रहे

ज़ब्त
मत पूछ कि हम ज़ब्त की किस राह से गुज़रे... ये देख कि तुझ पर कोई इल्ज़ाम न आया

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