'अच्छी सूरत वाले सारे पत्थर-दिल हों मुमकिन है', निदा फाजली के सबसे अच्छे शेर

Siraj Mahi
Oct 30, 2023


इक मुसाफ़िर के सफ़र जैसी है सब की दुनिया... कोई जल्दी में कोई देर से जाने वाला


अपनी तलाश अपनी नज़र अपना तजरबा... रस्ता हो चाहे साफ़ भटक जाना चाहिए


चराग़ जलते ही बीनाई बुझने लगती है... ख़ुद अपने घर में ही घर का निशाँ नहीं मिलता


यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें... इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो


फ़ासला नज़रों का धोका भी तो हो सकता है... वो मिले या न मिले हाथ बढ़ा कर देखो


पहले हर चीज़ थी अपनी मगर अब लगता है... अपने ही घर में किसी दूसरे घर के हम हैं


चलते रहते हैं कि चलना है मुसाफ़िर का नसीब... सोचते रहते हैं किस राहगुज़र के हम हैं


एक महफ़िल में कई महफ़िलें होती हैं शरीक... जिस को भी पास से देखोगे अकेला होगा


अच्छी सूरत वाले सारे पत्थर-दिल हों मुमकिन है... हम तो उस दिन राय देंगे जिस दिन धोका खाएँगे

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