'यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें'; निदा फाजली के चुनिंदा शेर

Sep 02, 2023

निदा फाजली
यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें... इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो

निदा फाजली
ख़ुदा के हाथ में मत सौंप सारे कामों को... बदलते वक़्त पे कुछ अपना इख़्तियार भी रख

निदा फाजली
वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में... जो दूर है वो दिल से उतर क्यूँ नहीं जाता

निदा फाजली
हर एक बात को चुप-चाप क्यूँ सुना जाए... कभी तो हौसला कर के नहीं कहा जाए

निदा फाजली
उस के दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा... वो भी मेरी ही तरह शहर में तन्हा होगा

निदा फाजली
एक महफ़िल में कई महफ़िलें होती हैं शरीक... जिस को भी पास से देखोगे अकेला होगा

निदा फाजली
फ़ासला नज़रों का धोका भी तो हो सकता है... वो मिले या न मिले हाथ बढ़ा कर देखो

निदा फाजली
अब ख़ुशी है न कोई दर्द रुलाने वाला... हम ने अपना लिया हर रंग ज़माने वाला

निदा फाजली
पहले हर चीज़ थी अपनी मगर अब लगता है... अपने ही घर में किसी दूसरे घर के हम हैं

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