अब तो मिल जाओ हमें तुम कि तुम्हारी ख़ातिर... इतनी दूर आ गए दुनिया से किनारा करते

Siraj Mahi
Jul 03, 2024

आँख से दूर सही दिल से कहाँ जाएगा... जाने वाले तू हमें याद बहुत आएगा

ख़्वाब ही ख़्वाब कब तलक देखूँ... काश तुझ को भी इक झलक देखूँ

काश देखो कभी टूटे हुए आईनों को... दिल शिकस्ता हो तो फिर अपना पराया क्या है

हवा के दोश पे रक्खे हुए चराग़ हैं हम... जो बुझ गए तो हवा से शिकायतें कैसी

जो दिल को है ख़बर कहीं मिलती नहीं ख़बर... हर सुब्ह इक अज़ाब है अख़बार देखना

जवानी क्या हुई इक रात की कहानी हुई... बदन पुराना हुआ रूह भी पुरानी हुई

मैं तन्हा था मैं तन्हा हूँ... तुम आओ तो क्या न आओ तो क्या

हज़ार तरह के सदमे उठाने वाले लोग... न जाने क्या हुआ इक आन में बिखर से गए

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