सिर्फ दाढ़ी-टोपी नहीं होता है इस्लाम; मुसलमान होने के लिए करने पड़ते हैं ये 9 काम
Siraj Mahi
Sep 04, 2023
तौहीद इसका मतलब होता है, अल्लाह को एक मानना. अल्लाह के सिवा किसी की इबादत नहीं करना और प्रोफेट मोहम्मद (स.) को अल्लाह का भेजा हुआ आखिरी दूत मानना.
कुरआन कुरआन को अल्लाह की भेजी हुई आखिरी किताब मानना और उसके पहले की किताबों पर यकीन करना. प्रोफेट मुहम्मद के पहले के नबी पर भी यकीन रखना दीन का हिस्सा बताया गया है.
कयामत अल्लाह के फरिश्तों पर, अच्छी- बुरी तकदीर पर और कयामत के बाद फिर से जिंदा होने और दुनिया में किये गए अपने कर्मों का हिसाब देने पर यकीन करना.
नमाज हर मुसलमान पर दिन में पांच वक्त फज्र (सुबह), जुहर (दोपहर), अस्र (सूरज डूबने से पहले), मगरिब (सूरज डूबने के बाद) और ईशा (रात) की नमाज पढ़ना अनिवार्य है.
रोजा हर बालिग़ मुसलमान मर्द और औरत पर रमजान के महीने में रोजे रखना अनिवार्य होता है.
जकात हर मुसलमान को अपनी बचत का 2.5 फीसद हिस्सा गरीबों में दान करना अनिवार्य होता है, जिसे जकात के नाम से जाना जाता है.
सोने-चांदी पर ज़कात जिसके पास 7.5 तोला सोना या 52.5 तोला चांदी या दोनों में से किसी के बराबर नकदी हो और उस पर साल गुजर चुका हो तो उसपर भी ज़कात देना फ़र्ज़ हो जाता है.
हज आर्थिक रूप से सक्षम हर मुसलमान के लिए जिंदगी में एक बार सऊदी अरब के मक्का जाकर हज करना फर्ज है. हालांकि, जिनके पास पैसे नहीं है, उन्हें हज से छूट दी गई है.
जन्नत और दोजख जो मुसलमान इस्लाम के सिद्धांत पर अपना जीवन नहीं बिताएगा उसे मरने के बाद दोजख में और जो इस्लाम का अनुसरण करेगा उसे मरने के बाद जन्नत में डाला जाएगा.