इन लोगों को इफ्तार कराने का है बड़ा सवाब

Siraj Mahi
Mar 18, 2024

इफ्तार
रमजान के दिनों में शाम को सूरज डूबने के बाद जब मुसलमान कुछ खाते-पाते हैं उसे उसे रोजा खोलना या इफ्तार करना कहते हैं.

खजूर
मौलाना मुजम्मिल सिद्दीकी बताते हैं कि खजूर या छुहारे से इफ्तार करना सुन्नत करना है. इसकी वजह यह है कि प्रोफेट मोहम्मद स0 खजूर से रोजा इफ्तार किया करते थे.

पानी
अगर खजूर नहीं हो तो पानी से इफ्तार करना चाहिए. इससे जिस्म में तरावट आती है. हदीस में जिक्र है कि जिसने पानी से इफ्तार किया उसे 10 नेकियां मिलेंगी.

परिवार
अल्लाह के रसूल स. फरमाते हैं कि रोजा हमेशा अपने परिवार यानी बीवी, बच्चे, भाई, बहन के साथ खोलना चाहिए.

लुक्में पर सवाब
परिवार के साथ इफ्तार करने वालों को अल्लाह ताला हर लुकमे के बदले एक गुलाम आजाद करने का सवाब देता है.

गुनाह माफ
मौलाना बताते हैं कि किसी को रोजा इफ्तार कराना सवाब है. हदीस में आता है कि अगर कोई शख्स किसी रोजेदार को इफ्तार कराएगा, उसके सारे गुनाह माफ कर दिए जाएंगे.

इफ्तार में शामिल
अगर कोई शख्स किसी के साथ इफ्तार में शामिल होता है, तो उसे भी इतना ही सवाब मिलता है.

सवाब
एक हदीस में आता है कि "जिस शख्स ने किसी रोजेदार को भरपेट खाना खिलाया, अल्लाह पाक कयामत के दिन उसे ऐसा शरबत पिलाएगा कि उसे कभी प्यास नहीं लगेगी."

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