राय पहले से बना ली तू ने दिल में अब हम तेरे घर क्या करते

Siraj Mahi
Jun 26, 2023


काँप उठती हूँ मैं ये सोच के तन्हाई में मेरे चेहरे पे तिरा नाम न पढ़ ले कोई


अब तो इस राह से वो शख़्स गुज़रता भी नहीं अब किस उम्मीद पे दरवाज़े से झाँके कोई


इक नाम क्या लिखा तिरा साहिल की रेत पर फिर उम्र भर हवा से मेरी दुश्मनी रही


वो न आएगा हमें मालूम था इस शाम भी इंतिज़ार उस का मगर कुछ सोच कर करते रहे


मैं सच कहूंगी मगर फिर भी हार जाऊंगी वो झूट बोलेगा और ला-जवाब कर देगा


बोझ उठाते हुए फिरती है हमारा अब तक ऐ ज़मीं माँ तिरी ये उम्र तो आराम की थी.


मैं फूल चुनती रही और मुझे ख़बर न हुई वो शख़्स आ के मिरे शहर से चला भी गया


कैसे कह दूँ कि मुझे छोड़ दिया है उस ने बात तो सच है मगर बात है रुस्वाई की


हथेलियों की दुआ फूल बन के आई हो कभी तो रंग मिरे हाथ का हिनाई हो

VIEW ALL

Read Next Story