'चलने का हौसला नहीं रुकना मुहाल कर दिया', परवीन शाकिर के शेर

Siraj Mahi
Oct 31, 2023


हारने में इक अना की बात थी... जीत जाने में ख़सारा और है


हुस्न के समझने को उम्र चाहिए जानाँ... दो घड़ी की चाहत में लड़कियाँ नहीं खुलतीं


दुश्मनों के साथ मेरे दोस्त भी आज़ाद हैं... देखना है खींचता है मुझ पे पहला तीर कौन


वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया... बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता


बस ये हुआ कि उस ने तकल्लुफ़ से बात की... और हम ने रोते रोते दुपट्टे भिगो लिए


कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी... दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी


कैसे कह दूँ कि मुझे छोड़ दिया है उस ने... बात तो सच है मगर बात है रुस्वाई की


आख़िरश वो भी कहीं रेत पे बैठी होगी... तेरा ये प्यार भी दरिया है उतर जाएगा


चलने का हौसला नहीं रुकना मुहाल कर दिया... इश्क़ के इस सफ़र ने तो मुझ को निढाल कर दिया

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