'आफ़त तो है वो नाज़ भी अंदाज़ भी लेकिन'; पढ़ें अदा पर बेहतरीन शेर

Siraj Mahi
Aug 23, 2023

जलील मानिकपूरी
आप ने तस्वीर भेजी मैं ने देखी ग़ौर से... हर अदा अच्छी ख़मोशी की अदा अच्छी नहीं

निज़ाम रामपुरी
अंदाज़ अपना देखते हैं आइने में वो... और ये भी देखते हैं कोई देखता न हो

आरज़ू लखनवी
निगाहें इस क़दर क़ातिल कि उफ़ उफ़... अदाएँ इस क़दर प्यारी कि तौबा

अकबर इलाहाबादी
हया से सर झुका लेना अदा से मुस्कुरा देना... हसीनों को भी कितना सहल है बिजली गिरा देना

मिर्ज़ा ग़ालिब
इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा... लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं

जलील मानिकपूरी
ये जो सर नीचे किए बैठे हैं... जान कितनों की लिए बैठे हैं

आग़ा शाएर क़ज़लबाश
पहले इस में इक अदा थी नाज़ था अंदाज़ था... रूठना अब तो तिरी आदत में शामिल हो गया

अमीर मीनाई
आफ़त तो है वो नाज़ भी अंदाज़ भी लेकिन... मरता हूँ मैं जिस पर वो अदा और ही कुछ है

मीर तक़ी मीर
गुल हो महताब हो आईना हो ख़ुर्शीद हो मीर... अपना महबूब वही है जो अदा रखता हो

VIEW ALL

Read Next Story