Poetry on Bewafai: 'आशिक़ी में बहुत ज़रूरी है'; बेवफाई पर पढ़ें दिल दुखाने वाले शेर

Siraj Mahi
Aug 09, 2023

अहमद फ़राज़
चला था ज़िक्र ज़माने की बेवफ़ाई का। सो आ गया है तुम्हारा ख़याल वैसे ही

बशीर बद्र
आशिक़ी में बहुत ज़रूरी है। बेवफ़ाई कभी कभी करना

बशीर बद्र
कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी। यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता

जौन एलिया
इक अजब हाल है कि अब उस को। याद करना भी बेवफ़ाई है

फ़िराक़ गोरखपुरी
हम से क्या हो सका मोहब्बत में। ख़ैर तुम ने तो बेवफ़ाई की

बहादुर शाह ज़फ़र
तुम ने किया न याद कभी भूल कर हमें। हम ने तुम्हारी याद में सब कुछ भुला दिया

मीर तक़ी मीर
बेवफ़ाई पे तेरी जी है फ़िदा। क़हर होता जो बा-वफ़ा होता

क़तील शिफ़ाई
हम उसे याद बहुत आएँगे। जब उसे भी कोई ठुकराएगा

महताब आलम
दिल भी तोड़ा तो सलीक़े से न तोड़ा तुम ने। बेवफ़ाई के भी आदाब हुआ करते हैं

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