Poetry on Eyes: 'इक हसीं आँख के इशारे पर', पढ़ें आंखों पर चुनिंदा शेर

Siraj Mahi
Aug 15, 2023

जिगर मुरादाबादी
हसीं तेरी आँखें हसीं तेरे आँसू। यहीं डूब जाने को जी चाहता है

अब्दुल हमीद अदम
इक हसीं आँख के इशारे पर। क़ाफ़िले राह भूल जाते हैं

ख़ुमार बाराबंकवी
ख़ुदा बचाए तिरी मस्त मस्त आँखों से। फ़रिश्ता हो तो बहक जाए आदमी क्या है

फ़िराक़ गोरखपुरी
जो उन मासूम आँखों ने दिए थे। वो धोके आज तक मैं खा रहा हूँ

मुनव्वर राना
एक आँसू भी हुकूमत के लिए ख़तरा है। तुम ने देखा नहीं आँखों का समुंदर होना

मुनव्वर राना
तुम्हारी आँखों की तौहीन है ज़रा सोचो। तुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है

जिगर मुरादाबादी
तेरी आँखों का कुछ क़ुसूर नहीं। हाँ मुझी को ख़राब होना था

जाँ निसार अख़्तर
लोग कहते हैं कि तू अब भी ख़फ़ा है मुझ से। तेरी आँखों ने तो कुछ और कहा है मुझ से

बशीर बद्र
कभी कभी तो छलक पड़ती हैं यूँही आँखें। उदास होने का कोई सबब नहीं होता

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