Poetry on Hair: 'किस ने भीगे हुए बालों से ये झटका पानी', पढ़ें बालों पर बेहतरीन शेर

Siraj Mahi
Aug 20, 2023

आरज़ू लखनवी
पूछा जो उन से चाँद निकलता है किस तरह... ज़ुल्फ़ों को रुख़ पे डाल के झटका दिया कि यूँ

जौन एलिया
अपने सर इक बला तो लेनी थी... मैं ने वो ज़ुल्फ़ अपने सर ली है

मुनव्वर राना
कुछ बिखरी हुई यादों के क़िस्से भी बहुत थे... कुछ उस ने भी बालों को खुला छोड़ दिया था

एहसान दानिश
ये उड़ी-उड़ी सी रंगत ये खुले-खुले से गेसू... तिरी सुब्ह कह रही है तिरी रात का फ़साना

मोहम्मद रफ़ी सौदा
जब यार ने उठा कर ज़ुल्फ़ों के बाल बाँधे... तब मैं ने अपने दिल में लाखों ख़याल बाँधे

मिर्ज़ा ग़ालिब
नींद उस की है दिमाग़ उस का है रातें उस की हैं... तेरी ज़ुल्फ़ें जिस के बाज़ू पर परेशाँ हो गईं

रज़ा अज़ीमाबादी
देखी थी एक रात तिरी ज़ुल्फ़ ख़्वाब में... फिर जब तलक जिया मैं परेशान ही रहा

आरज़ू लखनवी
किस ने भीगे हुए बालों से ये झटका पानी... झूम के आई घटा टूट के बरसा पानी

मीर तक़ी मीर
हम हुए तुम हुए कि 'मीर' हुए... उस की ज़ुल्फ़ों के सब असीर हुए

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