जावेद सबा
मुझे तन्हाई की आदत है मेरी बात छोड़ें ये लीजे आप का घर आ गया है हात छोड़ें

Siraj Mahi
Aug 14, 2023

गुलज़ार
अपने साए से चौंक जाते हैं उम्र गुज़री है इस क़दर तन्हा

गुलज़ार
ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा

फ़िराक़ गोरखपुरी
मैं हूँ दिल है तन्हाई है तुम भी होते अच्छा होता

रवीन शाकिर
इतने घने बादल के पीछे कितना तन्हा होगा चाँद

फ़िराक़ गोरखपुरी
अब तो उन की याद भी आती नहीं कितनी तन्हा हो गईं तन्हाइयाँ

उम्मीद फ़ाज़ली
ये सर्द रात ये आवारगी ये नींद का बोझ हम अपने शहर में होते तो घर गए होते

सहबा अख़्तर
सूने घरों में रहने वाले कुंदनी चेहरे कहते हैं सारी सारी रात अकेले-पन की आग जलाती है

ज़ेहरा निगाह
अब इस घर की आबादी मेहमानों पर है कोई आ जाए तो वक़्त गुज़र जाता है

VIEW ALL

Read Next Story