Poetry on Mehndi: पढ़ें; मेहंदी पर खूबसूरत शेर

Siraj Mahi
Aug 08, 2023

रियाज़ ख़ैराबादी
मेहंदी लगाए बैठे हैं कुछ इस अदा से वो। मुट्ठी में उन की दे दे कोई दिल निकाल के


क़ैसर हैदरी देहलवी
चुरा के मुट्ठी में दिल को छुपाए बैठे हैं। बहाना ये है कि मेहंदी लगाए बैठे हैं

अमीक़ हनफ़ी
दोनों का मिलना मुश्किल है दोनों हैं मजबूर बहुत। उस के पाँव में मेहंदी लगी है मेरे पाँव में छाले हैं

हैदर अली आतिश
मेहंदी लगाने का जो ख़याल आया आप को। सूखे हुए दरख़्त हिना के हरे हुए

लाला माधव राम जौहर
मल रहे हैं वो अपने घर मेहंदी। हम यहाँ एड़ियाँ रगड़ते हैं

मिर्ज़ा अज़फ़री
हम गुनहगारों के क्या ख़ून का फीका था रंग। मेहंदी किस वास्ते हाथों पे रचाई प्यारे

नामालूम
छुपाती रही वो हाथो की मेहंदी सबसे। लगाती थी जब मेहंदी मेरे नाम की

नामालूम
मेहंदी ने ग़ज़ब दोनों तरफ़ आग लगा दी तलवों में उधर और इधर दिल में लगी है

नामालूम
मेरे हाथों की लकीरों में वो नहीं। उसके हाथों की मेहँदी में मैं नहीं

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