सफ़र
एक सफ़र वो है जिस में... पाँव नहीं दिल थकता है

Siraj Mahi
May 28, 2024

तन्हा
ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा... क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा

नींद
इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई... हम न सोए रात थक कर सो गई

मरहले
सफ़र में ऐसे कई मरहले भी आते हैं... हर एक मोड़ पे कुछ लोग छूट जाते हैं

इंतिज़ार
मैं लौटने के इरादे से जा रहा हूँ मगर... सफ़र सफ़र है मिरा इंतिज़ार मत करना

ख़बर
मुझे ख़बर थी मिरा इंतिज़ार घर में रहा... ये हादसा था कि मैं उम्र भर सफ़र में रहा

मंज़िल
किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल... कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा

तलाश
किस की तलाश है हमें किस के असर में हैं... जब से चले हैं घर से मुसलसल सफ़र में हैं

धूप
सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो... सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो

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