पोलियो एक संक्रामक बीमारी है, जो वायरस की वजह से होती है. ये बीमारी के वायरस तीन प्रकार के होते हैं.
यह बीमारी अक्सर गंदगी से युक्त पानी या खाने पीने की चीजों में हो सकती है. छोटे बच्चों को अधिक खतरा होता है, क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम ज्यादा मजबूत नहीं होता है.
आइए जानते हैं पोलियो कितने प्रकार के होते हैं और इसके आमतौर पर क्या लक्षण होते हैं. इसके साथ ही पोलियो से बचाव के लिए क्या करना चाहिए.
पोलियो टाइप 1 के लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, बुखार, थकान और मांसपेशियों का दर्द शामिल हो सकते हैं. यह लक्षण बच्चों और नौजवानों दोनों में पाए जा सकते हैं.
पोलियो टाइप 1 अभी भी कई इलाकों में मौजूद है. पोलियो टाइप 1 वायरस की वजह से होती है. यह वायरस खाने-पीने के माध्यम से फैलता है.
पोलियो टाइप 2 के लक्षण में थकान, बुखार, गले में दर्द और आंखों के चारों ओर के सूजन जैसे लक्षण हो सकते हैं.
पोलियो टाइप 2 की वजह से भी पोलियो वायरस होता है. भारत में आखिरी बार इसका पता 1999 में लगाया गया था.
पोलियो टाइप 3 के लक्षण में गले में दर्द, बुखार, थकान और चरमपंथी दर्द शामिल हो सकते हैं.
टाइप 3 भी एक प्रकार का पोलियो वायरस होता है, ये टाइप 3 का वायरस है. इसे भारत में आखिरी बार नवंबर साल 2012 में पाया गया था. साल 2019 में इस वायरस को खत्म करने का ऐलान किया गया था.
टीकाकरण, पोलियो से बचाव का सबसे महत्वपूर्ण तरीका होता है. टीकाकरण से हम अपने बच्चों को पोलियो के खतरे से सुरक्षित रख सकते हैं. पोलियो से बचने के लिए डिप इन टीका लगाय जाता है, जिससे बच्चों का इम्यून सिस्टम मजबूत हो.