'अभी तो बात करो हम से दोस्तों की तरह', कतील शिफाई के शेर

Siraj Mahi
Oct 01, 2023

अभी तो बात करो हम से दोस्तों की तरह... फिर इख़्तिलाफ़ के पहलू निकालते रहना

हुस्न को चाँद जवानी को कँवल कहते हैं... उन की सूरत नज़र आए तो ग़ज़ल कहते हैं

जो भी आता है बताता है नया कोई इलाज... बट न जाए तिरा बीमार मसीहाओं में

अंगड़ाई पर अंगड़ाई लेती है रात जुदाई की... तुम क्या समझो तुम क्या जानो बात मिरी तन्हाई की

माना जीवन में औरत इक बार मोहब्बत करती है... लेकिन मुझ को ये तो बता दे क्या तू औरत ज़ात नहीं

आया ही था अभी मिरे लब पे वफ़ा का नाम... कुछ दोस्तों ने हाथ में पत्थर उठा लिए

मैं अपने दिल से निकालूँ ख़याल किस किस का... जो तू नहीं तो कोई और याद आए मुझे

सितम तो ये है कि वो भी न बन सका अपना... क़ुबूल हम ने किए जिस के ग़म ख़ुशी की तरह

मुफ़्लिस के बदन को भी है चादर की ज़रूरत... अब खुल के मज़ारों पे ये एलान किया जाए

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