कतील शिफाई के चुनिंदा शेर; 'अच्छा यक़ीं नहीं है तो कश्ती डुबा के देख'

Siraj Mahi
Aug 30, 2023

कतील शिफाई
हालात से ख़ौफ़ खा रहा हूँ... शीशे के महल बना रहा हूँ

कतील शिफाई
हुस्न को चाँद जवानी को कँवल कहते हैं... उन की सूरत नज़र आए तो ग़ज़ल कहते हैं

कतील शिफाई
वो मेरा दोस्त है सारे जहाँ को है मालूम... दग़ा करे वो किसी से तो शर्म आए मुझे

कतील शिफाई
अच्छा यक़ीं नहीं है तो कश्ती डुबा के देख... इक तू ही नाख़ुदा नहीं ज़ालिम ख़ुदा भी है

कतील शिफाई
क्या जाने किस अदा से लिया तू ने मेरा नाम... दुनिया समझ रही है कि सच-मुच तिरा हूँ मैं

कतील शिफाई
कुछ कह रही हैं आप के सीने की धड़कनें... मेरा नहीं तो दिल का कहा मान जाइए

कतील शिफाई
रहेगा साथ तिरा प्यार ज़िंदगी बन कर... ये और बात मिरी ज़िंदगी वफ़ा न करे

कतील शिफाई
हम को आपस में मोहब्बत नहीं करने देते... इक यही ऐब है इस शहर के दानाओं में

कतील शिफाई
जिस बरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है... उस को दफ़नाओ मिरे हाथ की रेखाओं में

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