Rahat Indori Poetry: 'सोए रहते हैं ओढ़ कर ख़ुद को', राहत इंदौरी के शेर

Siraj Mahi
Sep 17, 2023

चराग़ों का घराना चल रहा है... हवा से दोस्ताना चल रहा है

सोए रहते हैं ओढ़ कर ख़ुद को... अब ज़रूरत नहीं रज़ाई की

दोस्ती जब किसी से की जाए... दुश्मनों की भी राय ली जाए

नए किरदार आते जा रहे हैं... मगर नाटक पुराना चल रहा है

मैं आ कर दुश्मनों में बस गया हूँ... यहाँ हमदर्द हैं दो-चार मेरे

बोतलें खोल कर तो पी बरसों... आज दिल खोल कर भी पी जाए

घर के बाहर ढूँढता रहता हूँ दुनिया... घर के अंदर दुनिया-दारी रहती है

बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए... मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए

सूरज सितारे चाँद मिरे साथ में रहे... जब तक तुम्हारे हाथ मिरे हाथ में रहे

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