कलीम आजिज़
दर्द ऐसा है कि जी चाहे है ज़िंदा रहिए ज़िंदगी ऐसी कि मर जाने को जी चाहे है

Siraj Mahi
Jun 07, 2023

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कब ठहरेगा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी सुनते थे वो आएँगे सुनते थे सहर होगी

निदा फ़ाज़ली
बे-नाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता जो बीत गया है वो गुज़र क्यूँ नहीं जाता

ज़ुबैर अली ताबिश
आज तो दिल के दर्द पर हँस कर दर्द का दिल दुखा दिया मैं ने

हफ़ीज़ जालंधरी
दोस्तों को भी मिले दर्द की दौलत या रब मेरा अपना ही भला हो मुझे मंज़ूर नहीं

जाँ निसार अख़्तर
अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं

मंज़र लखनवी
दर्द हो दिल में तो दवा कीजे और जो दिल ही न हो तो क्या कीजे

जलाल लखनवी
इश्क़ की चोट का कुछ दिल पे असर हो तो सही दर्द कम हो या ज़ियादा हो मगर हो तो सही

जिगर मुरादाबादी
आदत के ब'अद दर्द भी देने लगा मज़ा हँस हँस के आह आह किए जा रहा हूँ मैं

जलील मानिकपूरी
हाल तुम सुन लो मिरा देख लो सूरत मेरी दर्द वो चीज़ नहीं है कि दिखाए कोई

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