बे पिए ही शराब से नफ़रत ये जहालत नहीं तो फिर क्या है

Siraj Mahi
Jun 20, 2023


हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं


तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ


देखा है ज़िंदगी को कुछ इतने क़रीब से चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से


आओ कि आज ग़ौर करें इस सवाल पर देखे थे हम ने जो वो हसीं ख़्वाब क्या हुए


दूर रह कर न करो बात क़रीब आ जाओ याद रह जाएगी ये रात क़रीब आ जाओ


तू मुझे छोड़ के ठुकरा के भी जा सकती है तेरे हाथों में मिरे हाथ हैं ज़ंजीर नहीं


अपनी तबाहियों का मुझे कोई ग़म नहीं तुम ने किसी के साथ मोहब्बत निभा तो दी


तुम मेरे लिए अब कोई इल्ज़ाम न ढूंढो चाहा था तुम्हें इक यही इल्ज़ाम बहुत है


ये माना मैं किसी क़ाबिल नहीं हूँ इन निगाहों में बुरा क्या है अगर ये दुख ये हैरानी मुझे दे दो

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