कैसे कह दूँ कि मुलाक़ात नहीं होती है रोज़ मिलते हैं मगर बात नहीं होती है

Siraj Mahi
Jun 24, 2023


ऐ मोहब्बत तिरे अंजाम पे रोना आया जाने क्यूँ आज तिरे नाम पे रोना आया


काँटों से गुज़र जाता हूँ दामन को बचा कर फूलों की सियासत से मैं बेगाना नहीं हूँ


अब तो ख़ुशी का ग़म है न ग़म की ख़ुशी मुझे बे-हिस बना चुकी है बहुत ज़िंदगी मुझे


मुझे तो क़ैद-ए-मोहब्बत अज़ीज़ थी लेकिन किसी ने मुझ को गिरफ़्तार कर के छोड़ दिया


मुश्किल था कुछ तो इश्क़ की बाज़ी को जीतना कुछ जीतने के ख़ौफ़ से हारे चले गए


बदलती जा रही है दिल की दुनिया नए दस्तूर होते जा रहे हैं


तुझ से बरहम हूँ कभी ख़ुद से ख़फ़ा कुछ अजब रफ़्तार है तेरे बग़ैर

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