जौन एलिया
ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता। एक ही शख़्स था जहान में क्या

Siraj Mahi
Aug 12, 2023

मिर्ज़ा ग़ालिब
हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद। जो नहीं जानते वफ़ा क्या है

अहमद फ़राज़
हुआ है तुझ से बिछड़ने के बा'द ये मा'लूम। कि तू नहीं था तिरे साथ एक दुनिया थी

गुलज़ार
आप के बा'द हर घड़ी हम ने। आप के साथ ही गुज़ारी है

अकबर इलाहाबादी
आई होगी किसी को हिज्र में मौत। मुझ को तो नींद भी नहीं आती

अंजुम रहबर
मिलना था इत्तिफ़ाक़ बिछड़ना नसीब था। वो उतनी दूर हो गया जितना क़रीब था

इरफ़ान सिद्दीक़ी
बदन में जैसे लहू ताज़ियाना हो गया है। उसे गले से लगाए ज़माना हो गया है

नामालूम
जल्दी टूटने वाले नहीं थे हम। बस कोई अपना बना कर तोड़ गया

नामालूम
रिश्ते भी आजकल दिलों के नहीं। जरूरत के रह गए हैं

नामालूम
गम ये नहीं के हम जुदा हो गए। गम ये है के प्यार मेरा बदनाम हो गया

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