'तुम मेरी तरफ़ देखना छोड़ो तो बताऊँ'; वसीम बरेलवी के शेर

Siraj Mahi
Sep 26, 2023

वो झूट बोल रहा था बड़े सलीक़े से... मैं ए'तिबार न करता तो और क्या करता

बहुत से ख़्वाब देखोगे तो आँखें... तुम्हारा साथ देना छोड़ देंगी

जहाँ रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा... किसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होता

आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता है... भूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है

आते आते मिरा नाम सा रह गया... उस के होंटों पे कुछ काँपता रह गया

झूट वाले कहीं से कहीं बढ़ गए... और मैं था कि सच बोलता रह गया

तुम मेरी तरफ़ देखना छोड़ो तो बताऊँ... हर शख़्स तुम्हारी ही तरफ़ देख रहा है

फूल तो फूल हैं आँखों से घिरे रहते हैं... काँटे बे-कार हिफ़ाज़त में लगे रहते हैं

मैं ने चाहा है तुझे आम से इंसाँ की तरह... तू मिरा ख़्वाब नहीं है जो बिखर जाएगा

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