ये 7 लोग हैं जकात के असली हकदार; इनको देने से होगी अदा

Mar 24, 2024

साहिबे निसाब
जिसके पास साढ़े बावन तोला चांदी या साढ़े सात तोला सोना, या इतन ही कीमत का व्यापार का माल हो, उसको शरिअत में मालदार कहते हैं. ऐसे शख्स को जकात का पैसा देना दुरुस्त नहीं और उसके जकात का पैसा लेना और खाना हलाल नहीं.

गरीब
जिसके पास उतना माल नहीं, बल्कि थोड़ा माल है या कुछ भी नहीं यानी एक दिन के गुजारे के लिए भी नहीं, उसको गरीब कहते हैं. ऐसे लोगों को जकात का पैसा देना दुरूस्त है और इन लोगों को लेना भी दुरुस्त है.

इनको न दें
अपनी जकात का पैसा अपने मां-बाप, दादी-दादा, नाना-नानी, परदादा वगैरह, जिन लोगों से यह पैदा हुई है, उनको देना दुरुस्त नहीं है. इसी तरह अपनी औलाद और पोते-पड़पोते, नाती वगैरह, जो लोग उसकी औलाद में दाखिल हैं, उनको भी देना दुरूस्त नहीं. ऐसे ही बीवी अपने मियां को और मियां अपनी बीवी को जकात नहीं दे सकते.

इनको दें
उन रिश्तेदारों के अलावा और सबको जकात देना दुरुस्त है, जैसे बहन-भाई, भतीजी, भांजी, चाचा, फूफी, खाला, मामूं, सौतेली मां, सौतेला बाप, दादा, सास, ससुर, वगैरह सबको देना दुरुस्त है.

नौकरों को
घर के नौकर चाकर, खिदमतगार, मामा, दाई, खिलाई वगैरह को भी जकात का पैसा देना दुरुस्त है, लेकिन उनकी तंख्वाह में हिसाब न करे, बल्कि तंख्वाह से ज्यादा इनआम-इकराम के तौर पर दे दें और दिल में जकात देने की नीयत रखे, तो दुरुस्त है.

दूध पिलाने वाली
जिस लड़के को तुमने दूध पिलाया है, उसको और जिसने तुम को बचपन में दूध पिलाया है, उसको जकात का पैसा देना दुरुस्त है.

गृहस्थी
रहने का घर और पहनने के कपड़े और काम-काज के लिए नौकर चाकर और घर की गिरहस्ती, जो अक्सर काम में रहती है, ये सब जरूरी समानों में दाखिल हैं. इनके होने से मालदार नहीं होंगे, चाहे जितनी कीमत हो, इसलिए इसको जकात का पैसा देना दुरुस्त है.

ज्यादा खर्च
किसी के पास दस पांच मकान हैं, जो किराए पर चलते हैं. लेकिन बाल-बच्चे और घर में खाने पीने वाले इतने ज्यादा है कि अच्छी तरह बसर नहीं होता. उसके पास कोई ऐसा माल भी नहीं, जिस पर जकात वाजिब हो, तो ऐसे सख्स को भी जकात का पैसा देना दुरुस्त है.

मुसाफिर को
एक शख्स अपने घर का बड़ा मालदार है, लेकिन सफर में ऐसा हुआ कि उसके पास कुछ खर्च नहीं रहा, सारा माल चोरी हो गया या और कोई वजह ऐसी हुई कि अब घर तक पहुंचने का भी खर्च नहीं रहा, ऐसे शख्स को भी जकात का पैसा दुरुस्त है.

काफिर को
जकात का पैसा किसी काफिर को देना दुरुस्त नहीं. मुसलमान ही को दे और जकात और उश्र और सदका-ए-फित्रर और कफ्फारे के सिवा और खैर-खैरात काफिर को भी देना दुरुस्त है.

नेक काम
जकात के पैसे से मस्जिद बनवाना या किसी लावारिस मुर्दे का कफन दफन कर देना, मुर्दे की तरफ से उसका कर्ज अदा कर देना या किसी और नेक काम में लगा देना दुरुस्त नहीं. जब तक किसी हकदार को न दिया जाए जकात अदा न होगी.

VIEW ALL

Read Next Story