Iran US war: पाकिस्तान में अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच समझौता नाकाम होने के बाद जंग के और तवील और पेचीदा होने का खद्सा बढ़ गया है. जिस तरह से तुर्किये और चीन इस मामले में बयानबाज़ी कर रहा है, उससे लग रहा है कि आने वाले दिनों में चीन इसमें कूद सकता है. खुद अमेरिका के एक बड़े अखबार ने इसपर रिपोर्ट पब्लिश किया है, जिसके बाद ट्रम्प की नींद हराम हो गई है.
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पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की कोशिश नाकाम होने के बाद अब हालात ऐसे पैदा हो रहे हैं, जिससे निकलने वाला हर रास्ता वर्ल्ड वॉर -3 की तरफ़ जाता है. इज़रायल का फ़िलिस्तीन, ईरान और लेबनान के ख़िलाफ़ एलाने जंग. तुर्किए को भी जंग में घसीटने की जी-तोड़ कोशिश करना, एक बड़ी जंग की आहट है. इस बीच अमेरिका और चीन के बीच भी तनाव पैदा हो गया है. दोनों मुल्कों में ज़बानी जंग और इल्ज़ामात के तीर चलने शुरू हो गए हैं.अमेरिकी मीडिया हाउस सीएनएन की एक रिपोर्ट ने दावा किया है कि चीन आने वाले कुछ ही हफ्तों में ईरान को बेहद एडवांस और ख़तरनाक एयर डिफेंस सिस्टम सौंपने वाला है जिससे मिडिल इस्ट का का पूरा पावर बैलेंस बिगड़ने वाला है.
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के हवाले से आई इस खबर ने वाशिंगटन की रातों की नींद उड़ा दी है, क्योंकि रिपोर्ट कहती है कि चीन इन हथियारों की डिलीवरी को छिपाने के लिए किसी तीसरे मुल्क का सहारा ले रहा है. जैसे ही यह खबर ट्रंप के कानों तक पहुंची, उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई. बौखलाए ट्रंप ने तानाशाही अंदाज़ में वॉर्निंग दी कि अगर उसने ईरान की मदद की तो बीजिंग को ऐसी बड़ी मुशकिलों और पाबंदियों का सामना करना पड़ेगा, जिसका उसने गुमान भी नहीं किया होगा. लेकिन ट्रंप हर बार वही ग़लती करते हैं, जो ईरान में कर चुके हैं. हर मुल्क इराक़ नहीं होता, लीबिया नहीं होता. सीरिया नहीं होता, वेनेजुएला नहीं होता. ईरान भी होता और उससे दस क़दम आगे खड़ा चीन भी होता है.
चीन ने अमेरिका के इन तमाम इल्ज़ामात को बेबुनियाद बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है.चीन की फॉरेन मिनिस्ट्री के तरजुमान गुओ जियाकुन ने साफ कहा है कि चीन पर लगाए जा रहे इल्ज़ाम पूरी तरह से गलत हैं और चीन हमेशा से हथियारों के एक्सपोर्ट को लेकर जिम्मेदार रहा है. बीजिंग का कहना है कि वह अपने घरेलू क़ानूनों और इंटरनैशनल उसूलों का पूरी तरह से पांबद है, और अमेरिका बिना किसी सबूत के उस पर कीचड़ उछाल रहा है.
चीन के डिफेंस मिनिस्टर डोंग जून ने तो इस मामले में और भी सख्त रुख अख्तियार कर लिया है. उन्होंने साफ कर दिया है कि दुनिया के अमन के लिए चीन अपने अज़्म पर क़ायम है, लेकिन वह अपने कमर्शियल इंटरेस्ट से कोई समझौता नहीं करेगा. डोंग जून ने अमेरिका को आइना दिखाते हुए कहा कि ईरान के साथ चीन के एनर्जी और कारोबारी समझौते हैं जिनको वो हर हाल में जारी रखेंगे. चीन ने दो टूक कहा कि कोई भी बाहरी मुल्क उनके दो तरफ़ा मामलों में दखल देने की जुर्रत न करे, क्योंकि चीन अपनी सावरनटी और अपने दोस्तों की हिफाजत करना जानता है.
डोंग जून ने साफ लहजे में कह दिया है कि चीन के जहाज होर्मुज स्ट्रेट में लगातार आ और जा रहे हैं, और ईरान के साथ उनके रिश्ते बेहद मजबूत हैं. चीन ने अमेरिका को वॉर्निंग दी है कि ईरान होर्मुज के रास्ते को कंट्रोल करता है और वह रास्ता चीन के लिए पूरी तरह खुला है. बीजिंग का यह बयान सीधे तौर पर अमेरिका की उस नाकेबंदी की धमकी को चुनौती है, जो ट्रंप ने ईरान को दी थी. ट्रंप ने कहा है कि अब होर्मुज़ से गुज़रने वाले हर जहाज़ की अमेरिका तलाशी लेगा, और ये देखेगा कि ईरान को इल्लीगल टोल किसने दिया है.
ऐसी सूरत में ये तस्वीर साफ़ होती जा रही है कि एक तरफ अमेरिका ईरान को पूरी तरह अलग-थलग करना चाहता है, तो दूसरी तरफ चीन ईरान की ढाल बनकर खड़ा हो गया है. अगर चीन का एयर डिफेंस सिस्टम ईरान पहुँचता है और अमेरिका उसे रोकने की कोशिश करता है, तो ये जंग वर्ल्ड वॉर-3 में तब्दील हो जाएगी. डिप्लोमेसी के सारे दरवाजे अब बंद होते दिख रहे हैं और दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतें अब एक-दूसरे को जंग के मैदान में ललकार रही हैं जिससे पूरी इंसानियत पर खतरा मंडराने लगा है.
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