डॉ कफील ने लिखा UNHRC को खत, NSA समेत इन मुद्दों को लेकर की हुकूमत की शिकायत

अपने जेल के दिनों को ज़िक्र करते हुए कफील ने लिखा कि मुझे दिमागी और जिस्मानी तौर पर अज़ियत (प्रताड़ित) दी गईं और कई दिनों तक खाना-पानी से भी महरूम रखा गया. 

डॉ कफील ने लिखा UNHRC को खत, NSA समेत इन मुद्दों को लेकर की हुकूमत की शिकायत
फाइल फोटो

नई दिल्ली: हाल में रिहा हुआ डॉ कफील ने हिंदुस्तान की कुछ बातों को लेकर UNHRC (United Nations Human Rights Commission) को खत लिखा है. डॉ कफील ने लिखा है कि हिंदुस्तान में नाइत्तफाकी (असहमति) की आवाज़ को दबाकर इंसानी हुकूक की खिलाफवर्ज़ी करके NSA और UAPA जैसे कानून का इस्तेमाल किया जा रहा है. 

उन्होंने अपने खत योगी हुकूमत की शिकायत करते हुए लिखा कि पुलिस ताकतों का इस्तेमाल करते हुए इंसानी हुकूक के मुहाफिज़ों (रक्षकों) के खिलाफ दहशतर्दी और नेशनल सिक्योरिट एक्ट के तहत इल्ज़ाम लगाए जा रहे हैं. इससे हिंदुस्तान का गरीब और हाशिए पर रहने वाला तबका मुतास्सिर होगा.

डॉ कफील ने लिखा कि CAA के खिलाफ पुरअमल मुज़ाहिरे करने वाले कारकुनों को गिरफ्तार करने पर UNHRC ने उनके इंसानी हुकूक की हिफाज़त करने के लिए हिंदुस्तानी हुकूमत से गुज़ारिश की, यह प्रशंसनीय है लेकिन हिंदुस्तानी हुकूमत ने उसकी अपील नहीं सुनी.

अपने जेल के दिनों को ज़िक्र करते हुए कफील ने लिखा कि मुझे दिमागी और जिस्मानी तौर पर अज़ियत (प्रताड़ित) दी गईं और कई दिनों तक खाना-पानी से भी महरूम रखा गया. यहां तक कि सलाहियत (क्षमता) से ज्यादा कैदियों वाली मथुरा जेल में 7 महीने की कैद के दौरान मुझसे गैर इंसानी सलूक किया गया. खुशकिस्मती से हाई कोर्ट ने मुझ पर लगाए गए एनएसए और 3 एक्सटेंशन को खारिज कर दिया.

गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी वाली बात का ज़िक्र करते हुए लिखा कि बच्चों की मौत के मामले में उसका कोई हाथ नहीं था. इसके बावजूद उसे फंसा दिया गया. इस मामले में हाईकोर्ट उसे बरी भी कर चुकी है लेकिन दूसरे मुकदमों की वजह से वह अब भी पेंडिंग है. 

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