Bombay HC on Indian Sailor Dead Body Case: मिडिल ईस्ट में जारी जंग के दौरान ओमान तट पर कथित मिसाइल हमले में भारतीय नाविक दीक्षित सोलंकी की मौत हो गई. उनका पार्थिव शरीर ओमान में हैं, और अब परिवार ने शरीर को भारत वापस लाने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिक दायर कर मदद की गुहार लगाई है. अब सबकी निगाहें कोर्ट के अगले आदेश पर टिकी है.
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Indian Sailor Dead Body in Oman: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने कई लोगों की जिंदगियां छीन लीं. इस जंग का असर सिर्फ ईरान, इजरायल में ही नहीं बल्कि मिडिल ईस्ट के कई देशों में भी देका जा सकता है. हालिया दिनों ने अमेरिका-इजरायल के जरिये लगाई गई आग में एक भारतीय परिवार को गहरे सदमे डाल दिया है. ओमान तट पर कथित ईरानी मिसाइल हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई, और उनका पार्थिव शरीर ओमान में ही फंसा है.
भारतीय नाविक के पार्थिव शरीर को भारत लाने की मांग अब अदालत तक पहुंच गई है. इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट में एक रिट याचिका दाखिल की गई है. यह याचिका अमरतलाल गोकलाल सोलंकी ने दायर की है. उन्होंने अदालत को बताया कि उनके बेटे दीक्षित सोलंकी जहाज "MKD Vyom" पर इंजन रूम में ऑयलर के पद पर काम कर रहे थे.
बीते माह 1 मार्च को जहाज के ऑपरेशंस मैनेजर कैप्टन सैडलर रिबेरो ने परिवार को सूचना दी कि मिसाइल हमले के दौरान दीक्षित घायल हो गए थे. जहाज में छेद हो जाने के कारण वह लापता हो गए. याचिका के मुताबिक, बाद में यह जानकारी दी गई कि जहाज पर मौजूद अन्य सभी क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन दीक्षित सोलंकी वहीं रह गए थे. इसके कुछ समय बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.
लाइव लॉ के मुताबिक, परिवार को 3 मार्च को बताया गया कि सुरक्षा वजहों से जहाज को पूरी तरह खाली कर दिया गया है, और उसे खोर फक्कन फुजैरा की ओर ले जाया जा रहा है. साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि फिलहाल किसी भी शख्स को जहाज पर चढ़ने की इजाजत नहीं है. याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि संबंधित अधिकारियों ने अब तक पार्थिव शरीर को भारत लाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है. उनका कहना है कि यह उनके अधिकारों का उल्लंघन है.
मृतक के परिजनों के जरिये दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि दीक्षित सोलंकी के पार्थिव शरीर को हासिल कर उसका अंतिम संस्कार करना परिवार का मौलिक अधिकार है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सुरक्षित है. इसके अलावा अधिकारियों पर यह कानूनी जिम्मेदारी भी है कि वे मर्चेंट नेवी एक्ट-2025 के प्रावधानों के मुताबिक जल्द से जल्द पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया पूरी करें.
इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखाड की पीठ के जरिये की जाएगी. अब देखना यह होगा कि अदालत इस संवेदनशील मामले में क्या निर्देश देती है और परिवार को कब तक अपने प्रियजन का पार्थिव शरीर मिल पाता है. अब सबकी निगाहें बॉम्बे हाई कोर्ट पर टिकी हुई हैं.