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तेल अवीव: इसराइल गाजा को पूरी तरह बर्बाद कर चुका है. हमास- इसराइल जंग में 65 हज़ार लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें ज़्यादातर बच्चे और महिलाएं शामिल हैं. इस जंग में लगभग 1.5 लाख लोगों के अंग भंग हो गए हैं, और 20 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं. यानी दो साल पहले तक जिन लोगों का अपना घर- परिवार और कारोबार था, आज वो सड़कों पर दान दिए हुए टेंट और रोटी-पानी पर जिंदा हैं.
मुस्लिम देश इसराइल को एक दुशमन देश मानते हैं, और इसराइल इन्हें अपना दुशमन मानता है. खुद के वजूद को बचाने के लिए इसराइल एक साथ कई मोर्चों पर जंग लड़ रहा है. कहा जाता है कि इस्राइल कभी कमज़ोर नहीं पड़ता है, क्यूंकि दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्कों अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन की उसे हिमायत हासिल है. लेकिन घरेलू मोर्चे पर ही इसराइल एक ऐसी समस्या से जूझ रहा है, जो वहां के दानिश्वरों और सिविल सोसाइटी के लोगों को परेशान कर दिया है.
हाल ही में एक रिपोर्ट पब्लिश की गई जो 'फेमिसाइड' में बड़े पैमाने पर हो रहे इजाफे की तरफ लोगों का ध्यान खींचा है.
क्या होता है फेमिसाइड ?
फेमिसाइड का मतलब किसी महिला या लड़की की जानबूझकर क़त्ल करना होता है. यह एक लिंग-आधारित हत्या होता है, जिसका अर्थ है कि महिला को उसके लिंग के कारण मार दिया जाता है. इसे घरेलू हिंसा और लिंग आधारित हिंसा का एक एक्सट्रीम क्राइम माना जाता है. इसमें हत्यारा अक्सर महिला का कोई ख़ास परिचित या नजदीकी आदमी होता है. वो उसका पति, प्रेमी, पिता या परिवार का कोई अन्य सदस्य हो सकता है. यह एक वैश्विक संकट है, जिसमें दुनिया भर में लाखों महिलाएँ और लड़कियाँ हर साल अपने विपरीत लिंग की वजह से पुरुषों द्वारा मारी जाती हैं.
यह रिपोर्ट बताती है कि 2025 के दौरान औरतों के क़त्ल के मामलों में मजीद इजाफा दर्ज किया गया है. इस साल कुल 32 औरतें इस तरह के तशदुद की शिकार हुईं हैं, जबकि गुजश्ता साल यह तादाद 20 के आसपास थी. यह इजाफा दिखाता है कि मुल्क में महिला-सुरक्षा को लेकर हालात और ज्तादा तशवीशनाक हो रहे हैं.
भारत या एशियाई देशों के लिए ये आंकडें कम लग सकते हैं, लेकिन इस्राइल के लिए साल में इतनी महिलाओं की हत्या, एक बड़ा मसला है. सिर्फ एक करोड़ की आबादी वाले इस देश में सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर कदम उठाता है. अपने नागरिकों की हत्या के लिए एक देश तक से भिड जाता है और वहां लाशें बिछा देता है. उसी देश के नागरिक आखिर अपने देश की महिलाओं और लड़कियों की हत्या क्यों कर रहे हैं ?
घरेलू हिंसा और लैंगिक अपराध अब इसराइल में एक बड़ी सामाजिक चुनौती बनकर उभरी है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि हत्या के इन मामलों में अवैध हथियारों का इस्तेमाल किया गया. 2025 में दर्ज हत्याओं में 14 मामले ऐसे थे जिसमें गोली मार कर हत्या की गई थी.
हालांकि, यह समस्या किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यहूदी और अरब दोनों समाजों में फैली हुई है.
इसी रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि 2025 में 18 यहूदी इजरायलियों की हत्या फेमिसाइड के मामलों में हुई, जबकि पिछले साल यह तादाद सिर्फ 10 थी. यानी यहूदी समुदाय के अंदर भी महिला-हत्या के मामलों में लगभग दोगुना इजाफा हुआ है. यह तथ्य आने वाले वक़्त के लिए और भी बड़ी खतरे की घंटी है, क्योंकि यह दिखाता है कि घरेलू और सामाजिक हिंसा का जोखिम कई स्तरों पर बढ़ रहा है.
यह रिपोर्ट 25 नवंबर, 'महिलाओं के विरुद्ध हिंसा उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस' से ठीक पहले प्रकाशित की गई, ताकि इस वैश्विक मुद्दे पर इजरायल की गंभीर स्थिति भी दुनिया के सामने लाया जा सके.
'इजरायल ऑब्जर्वेटरी ऑन फेमिसाइड' की निदेशक प्रोफेसर शल्वा वाइल बताती हैं कि अब सिर्फ पुलिस कार्रवाई या घटना के बाद की जांच काफी नहीं है. जरूरत है उन नीतियों और तंत्रों की पड़ताल करने की, जो शुरुआत में ही हिंसा के संकेतों को पहचानकर महिलाओं की जान बचा सके. वाइल ने इस्राइली संसद नेसेट से अपील की है कि वह महिलाओं की सुरक्षा के लिए कड़े कानूनों, प्रभावी निगरानी और तेज कार्रवाई की व्यवस्था बनाए. साथ ही उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इजरायल को इस्तांबुल कन्वेंशन स्वीकार करना चाहिए, जो महिलाओं के खिलाफ हिंसा रोकने के लिए दुनिया के कई देशों में लागू एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौता है.
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