Ex IAEA Chief on Donald Trump War Plan: ईरान पर ईरान पर अमेरिका-इजरायल हमलों में हजारों मौतों के बीच मोहम्मद अलबरादई ने ट्रंप के दावों को झूठा और अप्रमाणित बताया. उन्होंने चेतावनी दी कि यह जंग मिडिल ईस्ट को तबाही में बदल सकती है और संयुक्त राष्ट्र से तुरंत हस्तक्षेप की अपील की.
Trending Photos
)
Iran US War: अमेरिका-इजरायल की संयुक्त सेना बीते 28 फरवरी से ईरान में लगातार हवाई हमले कर रही है. ईरानी ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय, रेड क्रिसेंट ने इस हमले में दो हजार से ज्यादा लोगों के मारे जाने का दावा किया है, इसके उलट अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार ग्रुप HRANA ने 3500 से ज्यादा लोगों के मारे का दावा किया और बताया इसमें 250 से ज्यादा बच्चे शामिल हैं. इसको लेकर डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू की पूरी दुनिया में आलोचना हो रही है, और उसके मित्र देशों ने विरोध शुरू कर दिया है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक बार फिर अमेरिका की नीतियों पर सवाल उठने लगे हैं. ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दुनिया भर में आलोचना हो रही है, और अब अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े नेता भी खुलकर उनके खिलाफ बोलने लगे हैं. ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी (IAEA) के पूर्व प्रमुख मोहम्मद अलबरादई ने ट्रंप के जंग से जुड़े कदमों पर कड़ी नाराजगी जताई है. उन्होंने इन कार्रवाइयों को बेहद खतरनाक बताते हुए कहा कि इससे पूरे क्षेत्र में विनाशकारी हालात पैदा हो सकते हैं.
मोहम्मद अलबरादई ने अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसलों पर नाराजगी का इजहार किया है. उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप को अगर समय रहते नहीं रोका गया, तो पूरा मिडिल ईस्ट आग का गोला बन सकता है. उन्होंने चेतावनी दी कि इस जंग का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक ही नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है. उन्होंने खाड़ी देशों और संयुक्त राष्ट्र से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की.
IAEA के पूर्व प्रमुख अलबरादई ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि वैश्विक ताकतें चुप रहने के बजाय मजबूती से आगे आएं और हालात को बिगड़ने से रोकें. अपने बयान में उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा कि सभी संबंधित देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल करना चाहिए और इस खतरनाक स्थिति को रोकना चाहिए. उन्होंने सख्त शब्दों में कहा कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह तनाव किसी बड़े मानवीय और वैश्विक संकट में बदल सकता है.
यह भी पढ़ें: ईरान से दोनों अमेरिकी पायलट सुरक्षित रेस्क्यू; ट्रंप ने किया बड़ा दावा
अलबरादई ने यह भी साफ किया कि मौजूदा हालात बेहद संगीन हैं और दुनिया अब "मूक दर्शक" बनकर नहीं रह सकती है. उन्होंने जोर देकर कहा कि सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि ठोस और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है, ताकि क्षेत्र को बड़े विनाश से बचाया जा सके.
ट्रंप का आरोप निकला झूठा और अप्रमाणित
बता दें, मोहम्मद अलबरादई ने मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच अमेरिका के दावों और हकीकत को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने ईरान पर हमलों को सही ठहराने के लिए कई गंभीर आरोप लगाए, लेकिन बाद में इन्हीं दावों पर सवाल उठने लगे और कई बातें अतिरंजित या अप्रमाणित बताई गईं.
अमेरिका ने फरवरी-मार्च 2026 में "Operation Epic Fury" और उससे पहले जून 2025 के हमलों के दौरान दावा किया था कि ईरान तेजी से परमाणु हथियार बनाने के करीब पहुंच चुका है. ट्रंप ने कहा था कि ईरान कुछ हफ्तों या महीनों में परमाणु बम बना सकता है और उसके पास इतना संवर्धित यूरेनियम है कि वह हथियार ग्रेड सामग्री तैयार कर सकता है. उन्होंने यह भी कहा था कि यह आतंकवादी शासन कभी परमाणु हथियार नहीं पा सकता.
इसके अलावा अमेरिका ने आरोप लगाया कि ईरान लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित कर रहा है, जो यूरोप, अमेरिकी ठिकानों और भविष्य में अमेरिका की मुख्य भूमि तक पहुंच सकती हैं. हमलों का एक मकसद ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को पूरी तरह खत्म करना बताया गया. अमेरिका ने ईरान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया. आरोप है कि ईरान हमास, हिजबुल्लाह और हूती जैसे समूहों को हथियार, पैसा और ट्रेनिंग देता है, जो अमेरिकी सैनिकों और सहयोगियों पर हमले करते रहे हैं. इसके साथ ही 1979 के दूतावास बंधक संकट और 1983 के बेरूत बम धमाकों जैसे उदाहरण भी दिए गए.
ईरान को ट्रंप-नेत्याहू लगातार बताते रहे सहयोगियों के लिए खतरा
ट्रंप प्रशासन ने यह भी कहा कि ईरान अमेरिका, इजराइल और उसके सहयोगियों के लिए "तत्काल खतरा" है और हमले संयुक्त राष्ट्र के आत्मरक्षा प्रावधान (Article 51) के तहत किए गए. ट्रंप ने यहां तक कहा कि ईरान में शासन परिवर्तन जरूरी है और वहां की सेना को हथियार डाल देना चाहिए, लेकिन बाद में इन दावों पर गंभीर सवाल उठे. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने मार्च 2026 में कहा कि उन्हें ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के लिए संगठित कार्यक्रम चला रहा है. उन्होंने साफ कहा कि ईरान कुछ दिनों या हफ्तों में बम बनाने की स्थिति में नहीं था.
इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स ने भी ट्रंप के दावों झूठा करार दिया. जून 2025 के हमलों के बाद ट्रंप ने कहा था कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह तबाह हो गया है, लेकिन बाद में सामने आया कि यह असर सिर्फ कुछ महीनों का था. ईरान ने पहले ही अपने कई संसाधन सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दिए थे. मिसाइल क्षमता को लेकर भी अमेरिकी दावे अतिरंजित पाए गए. साल 2025 की अमेरिकी सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान अभी अमेरिका की जमीन तक पहुंचने वाली मिसाइल बनाने से कई साल दूर था. FactCheck.org और PBS जैसे संस्थानों ने ट्रंप के कई बयानों को गलत, अप्रमाणित और झूठा बताया.
सबसे बड़ा सवाल तत्काल खतरे के दावे पर उठा. पेंटागन कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका कि ईरान अमेरिका पर तुरंत हमला करने वाला था. कई एक्सपर्ट ने इन हमलों को "War of Choice" यानी खुद चुनी गई जंग बताया, न कि जरूरी आत्मरक्षा. इस जंग में आमलोगों की मौत को लेकर भी विवाद हुआ. अमेरिका ने दावा किया कि हमले सिर्फ सैन्य ठिकानों पर थे, लेकिन मिनाब में लड़कियों के स्कूल पर हमले में 170 से ज्यादा लोगों की मौत जैसे मामलों ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए. जांच में पता चला कि यह हमला अमेरिकी या इजराइली कार्रवाई का हिस्सा था, जबकि ट्रंप ने बिना सबूत इसे ईरान की गलती बताया था.
यह भी पढ़ें: ट्रंप के बड़बोलेपन को तेहरान का करारा जवाब, दो दशक में पहली बार अमेरिकी लड़ाकू विमान हुए ढेर