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नई दिल्ली : कोरोना से 200 से ज्यादा मुल्क जंग लड़ रहे हैं.यूरोप के कई मुल्कों समेत अमेरिका भी कोरोना वायरस के बेबस दिखाई दे रहा है.कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में अमेरिका ने हिंदुस्तान से ‘हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन’ दवा की मांग की है. न्यूज एजेंसी ANI के हवाले से ख़बर के मुताबिक "देश की जरूरतों को पूरा करने के बाद बचे हुए स्टॉक को मानवीय आधार पर बाहर भेजने के बारे में वज़ारते ख़ारिजा और फार्मा डिपार्टमेंट फैसला लेगा." हिंदुस्तान ने मंगल को साफ कर दिया गया है कि मुल्क की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के बाद इस दवा की मौजूदा तादात को देखते हुए फैसला किया जाएगा.
We will also be supplying these essential drugs to some nations who have been particularly badly affected by the pandemic. We would therefore discourage any speculation in this regard or any attempts to politicise the matter: Ministry of External Affairs (MEA) #COVID19 https://t.co/T4BPoXkLDM
— ANI (@ANI) April 7, 2020
इसके बाद वज़ारते ख़ारिजा की ओर से बयान जारी किया गया है कि "कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए मानवीय आधार पर हिंदुस्तान ने फैसला किया है कि हम पर निर्भर रहने वाले पड़ोसियों को पैरासिटामोल और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवाएं भेजी जाएंगी". इसके साथ ही ये भी कहा गया कि हम इन दवाओं की सप्लाई उन मुल्कों को भी देंगे जो कोरोना वबा से सबसे ज़्यादा मुतास्सिर हैं. इसके साथ ही इस मसले पर कोई कयास नहीं लगाया जाना चाहिए और ना ही इस पर सियासत करनी चाहिए.
बता दें पिछले दिनों वज़ीरे आज़म नरेंद्र मोदी के साथ टेलीफोन बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप ने मलेरिया के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ‘हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन’ दवा की मांग की थी. ट्रंप इस दवा को कोरोना के खिलाफ उपयोगी मानते हैं. हिंदुस्तान ने इस दवा के निर्यात पर पाबंदी लगा रखी है.लेकिन कुछ ही दिन बाद अमेरिका के सुर बदले नज़र आए अमेरिकी सद्र डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा कि निजी अपील के बाद भी हिंदुस्तान का दवाई ना देना उनके लिए चौंकाने वाला होगा क्योंकि वाशिंगटन के नई दिल्ली के साथ अच्छे रिलेशन हैं. इतना ही नहीं ट्रंप ने मलेरिया की ‘हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन’ दवाई ना देने पर हिंदुस्तान को कड़े रिज़ल्ट भुगतने की चेतावनी दी. जिस पर हिंदुस्तान ने दो टूक लहज़े में जवाब दिया.
गौरतलब है कि अमेरिका में कोरोना वबा के खिलाफ बड़े लेवल पर हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल किया जा रहा है, इसलिए अमेरिका को ये दवा चाहिए. भारत इस दवा का बड़ा उत्पादक मुल्क है, यहां पांच कंपनियां इस दवा को बनाती हैं. हिंदुस्तान में इसका इस्तेमाल मलेरिया, अर्थेराइटिस और ऑटो इम्यून बीमारियों से लड़ने में किया जाता है.
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