Anti Muslim Hate Crimes UK US India: रमजान के दौरान ब्रिटेन और अमेरिका में मस्जिदों और मुस्लिम संस्थानों पर हमलों की घटनाएं बढ़ गई हैं. इसने मानवाधिकार संगठनों, शांति पंसद लोगों और मुसलमानों के पेशानी पर बल पैदा कर दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले कुछ सालों में भारत की तरह यूरोप और अमेरिका में मुस्लिम विरोधी अपराध और इस्लामोफोबिक घटनाओं में तेजी से इजाफा हुआ है.
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Anti Muslim Hate Crimes: भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में मुसलमानों और उनकी धार्मिक जगहों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. हाल के महीनों में यूरोप और अमेरिका में मस्जिदों, इस्लामिक सेंटरों और मुस्लिम समुदाय से जुड़े संस्थानों पर हमलों और धमकी की घटनाओं ने मुसलमानों में एक अनचाहा डर पैदा कर दिया है.
रमजान के दौरान ब्रिटेन और अमेरिका में हुई हालिया घटनाओं ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि इस्लामोफोबिया और मुस्लिम विरोधी हिंसा किस तरह बढ़ रही है. एक्सपर्ट इस तरह की घटनाओं के लिए वेस्टर्न मीडिया और दक्षिणपंथी संगठनों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, जो लगातार मुसलमानों के खिलाफ कथित तौर पर नकारात्मक नैरेटिव सेट करने का काम किया है.
रमजान में मुसलमानों और मस्जिदों पर हमले बढ़े
ब्रिटेन के वॉर्सेस्टर शहर में स्थित एक मस्जिद के पास बने मुस्लिम समुदाय केंद्र पर फरवरी 2026 में असामाजिक तत्वों ने आग लगा दी. इस घटना ने लोगों को दहशत में डाल दिया. वॉर्सेस्टर मुस्लिम वेलफेयर एसोसिएशन (WMWA) ने इस घटना को जानबूझकर किया गया हमला बताया. WMWA ने कहा कि यह हमला नस्लीय और मजहबी नफरत से प्रेरित था. स्थानीय मीडिया और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के मुताबिक यह घटना उस समय हुई जब मुस्लिम समुदाय रमजान की तैयारियों में जुटा हुआ था. WMWA ने बयान जारी कर कहा कि इस तरह की घटनाएं समुदाय के भीतर डर और असुरक्षा का माहौल पैदा करती हैं.
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इसी महीने 26 फरवरी 2026 को ब्रिटेन के मैनचेस्टर सेंट्रल मस्जिद में भी एक शख्स ने हमला कर दिया था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपी कुल्हाड़ी और धारदार चाकू लेकर मस्जिद में घुसने की कोशिश कर रहा था. उस समय मस्जिद में तरावीह की नमाज के लिए करीब 2,000 से अधिक लोग मौजूद थे. मस्जिद के वालंटियर्स ने तुरंत आरोपी को काबू में कर लिया और बाद में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद पुलिस ने मामले में दूसरे संदिग्ध को भी गिरफ्तार किया और CCTV फुटेज की जांच शुरू की.
अमेरिका में मस्जिद पर फायरिंग
अमेरिका में भी इसी तरह की एक घटना 26 फरवरी 2026 को सामने आई. पेनसिल्वेनिया राज्य के 'पाइक काउंटी इस्लामिक सेंटर' पर अज्ञात हमलावर ने गोलीबारी की. रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोलीबारी के निशान मस्जिद के दरवाजों, खिड़कियों और नमाज पढ़ने वाले हिस्से में पाए गए. यह घटना भी रमजान के दौरान हुई, लेकिन उस समय मस्जिद के अंदर कोई मौजूद नहीं था, इसलिए किसी के घायल होने की खबर नहीं आई.
अमेरिका की मुस्लिम सिविल राइट्स संस्था CAIR-Philadelphia ने इस घटना की जांच को संभावित हेट क्राइम के रूप में करने की मांग की है और आरोपी की जानकारी देने वालों के लिए 5,000 डॉलर के इनाम की घोषणा की है. पेनसिल्वेनिया के गवर्नर जॉश शापिरो भी इस घटना के बाद मुस्लिम समुदाय के समर्थन में सामने आए.
पिछले कुछ सालों में दुनिया के कई हिस्सों में इस्लामोफोबिया और मुस्लिम विरोधी घटनाओं में बढ़ोतरी को लेकर मानवाधिकार संगठन, मुस्लिम संगठन और शांति पसंद लोगों ने चिंता जताई है. हाल के महीनों में सामने आए हमलों और धमकियों की घटनाएं भी इसी बड़े ट्रेंड का हिस्सा मानी जा रही हैं, जिसमें मुसलमानों और उनकी मजहबी पहचान को निशाना बनाने की घटनाएं सामने आई हैं.
भारत, यूरोप की तरह अमेरिका में भी कमोबेश हालात एक ही तरह हैं. मुस्लिम सिविल राइट्स संगठन (CAIR) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में 8,658 एंटी-मुस्लिम और एंटी-अरब शिकायतें दर्ज की गईं. यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है, जिसने वहां मुस्लिम समुदाय की सुरक्षा को लेकर बहस को तेज कर दिया है.
मुसलमानों पर धार्मिक हमले बढ़े
ब्रिटेन में सरकारी आंकड़े भी इस चिंता को और गहरा करते हैं. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक मार्च 2024 तक इंग्लैंड और वेल्स में 10,484 रिलीजियस हेट क्राइम दर्ज किए गए हैं. इन मामलों में बड़ी संख्या ऐसी थी, जिनमें मुसलमानों को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया था. एक्सपर्ट का मानना है कि ये आंकड़े समाज में बढ़ती धार्मिक नफरत की तरफ इशारा करते हैं.
ब्रिटेन के होम ऑफिस के आंकड़ों के मुताबिक इंग्लैंड और वेल्स में मार्च 2025 तक बीते साल के दौरान मुसलमानों के खिलाफ मजहब के आधार पर नफर की घटनाओं में करीब 19 फीसदी इजाफा दर्ज किया गया. इन मामलों की संख्या 2,690 से बढ़कर 3,199 तक पहुंच गई. इन आंकड़ों में लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस के आंकड़े शामिल नहीं हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, कुल नफरती हमलों में लगभग 45 फीसदी मामले मुसलमानों को निशाना बनाने से जुड़े थे, जिनकी संख्या 4,478 रही.
मुस्लिम विरोधी घटनाओं पर नजर रखने वाली संस्था Tell MAMA की रिपोर्ट भी इसी तस्वीर की पुष्टि करती है. संस्था के मुताबिक जून से सितंबर 2025 के बीच कुल 913 एंटी-मुस्लिम हेट मामले सामने आए. इनमें 17 घटनाएं सीधे तौर पर मस्जिदों या इस्लामिक संस्थानों पर हमलों से जुड़ी थीं, जिनमें तोड़फोड़, ग्रैफिटी और दीवारों पर नफरत भरे संदेश लिखने जैसे मामले शामिल थे.
इसी तरह ब्रिटिश मुस्लिम ट्रस्ट (BMT) की एक रिपोर्ट में भी मस्जिदों को निशाना बनाए जाने की कई घटनाओं का जिक्र किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई से अक्टूबर 2025 के बीच 25 मस्जिदों पर कुल 27 हमले किए गए, जिनमें कुछ जगहों पर एक ही मस्जिद को बार-बार निशाना बनाया गया है.
भारत की तर्ज पर ब्रिटेन में मजहबी नारे लगाकर हुए हमले
इन घटनाओं में से 25 फीदी से ज्यादा हमले हिंसक या खतरनाक प्रवृत्ति के थे. इनमें आगजनी की कोशिश, पत्थर या दूसरी खतरनाक चीजें फेंककर हमला करना जैसे मामले शामिल थे. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि करीब 40 फीसदी घटनाओं में ब्रिटिश या इंग्लिश झंडे और ईसाई राष्ट्रवादी प्रतीकों या नारों का इस्तेमाल किया गया, जिनमें 'Christ is King' जैसे स्लोगन भी देखे गए. वहीं करीब 11 फीसदी मामलों में ग्रैफिटी या नफरत भरे संदेश मस्जिदों की दीवारों पर लिखे गए.
कई एक्सपर्ट इन हमलों की तुलना भारत में मुसलमानों पर हो रहे हमले से कर रहे हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक, भारत में भी मुसलमानों पर हिंदूवादी और दक्षिणपंथी संगठन मजहब के बुनियाद पर हमले करते रहे हैं. गोवंश, व्यापार करने, मजहबी पहचान, नमाज पढ़ने और दूसरे इबादत के काम करते हुए हिंदूवादी संगठन मुसलमानों पर 'जय श्रीराम' जैसे नारे लगाकर हमला करते हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामोफोबिक हमलों में समय के साथ तेजी से इजाफा हुआ है. जुलाई 2025 में जहां सिर्फ एक हमला दर्ज किय गया, वहीं सितंबर और अक्टूबर में हर महीने 9-9 हमलों की घटनाएं सामने आईं. हैरान करने वाली बात यह कि पिछले कुछ सालों यह ट्रेंड बढ़ता ही जा रहा है. Tell MAMA की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में 6,313 इस्लामोफोबिक मामले सामने आए थे, जो 2022 के मुकाबले लगभग 165 फीसदी ज्यादा थे. एक्सपर्ट का कहना है कि 2025 में भी यह प्रवृत्ति जारी रही.
यूरोप के दूसरे देशों में भी बढ़े इस्लामोफोबिक केसेज
यूरोप के दूसरे देशों में भी इसी तरह की तस्वीर सामने आई है. जर्मनी में साल 2024 के दौरान 1,550 से ज्यादा इस्लामोफोबिक अपराध दर्ज किए गए. वहीं जर्मन सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से सितंबर 2025 के बीच ही 930 मुस्लिम विरोधी हिंसा और अपराध की घटनाएं सामने आई.
यूरोप में किए गए एक बड़े सर्वे में भी मुस्लिम समुदाय के अनुभवों को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आए. सर्वे के मुताबिक करीब 47 फीसदी मुसलमानों ने बताया कि उन्हें अपने रोजमर्रा के जिंदगी में किसी न किसी रूप में भेदभाव का सामना करना पड़ा है. यह भेदभाव कभी नौकरी, कभी शिक्षा और कभी सामाजिक व्यवहार के स्तर पर महसूस किया गया.
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